“मन के मैल को जला दे, वही सच्ची होली;

भक्ति के रंग में रंग दे, वही इसकी असली बोली |”

भारत त्योहारों और सांस्कृतिक परंपराओं का देश है | यहाँ मनाए जाने वाले प्रत्येक त्योहार का अपना विशेष महत्व होता है | ये त्योहार हमारे जीवन में आनंद, उत्साह और आपसी प्रेम की भावना को बढ़ाते हैं | भारत में मनाए जाने वाले सभी त्योहार केवल आनंद और उत्सव के लिए ही नहीं होते, बल्कि उनके पीछे गहरा आध्यात्मिक संदेश भी छिपा होता है | होली भी ऐसा ही एक महत्वपूर्ण पर्व है | सामान्य रूप से इसे रंगों का त्योहार कहा जाता है, परंतु इसका वास्तविक अर्थ आत्मिक शुद्धि, प्रेम और सत्य की विजय से जुड़ा हुआ है | होली का सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक संदेश बुराई पर अच्छाई की विजय है | प्रह्लाद और होलिका की कथा हमें यह सिखाती है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान की भक्ति करता है और सत्य के मार्ग पर चलता है, उसे कोई भी शक्ति पराजित नहीं कर सकती | होलिका दहन इस बात का प्रतीक है कि अहंकार, अन्याय और अधर्म का अंत निश्चित है, जबकि भक्ति और सच्चाई हमेशा विजयी होती है | यह त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार फागुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है |

आत्मीय विद्या मंदिर परिसर में इस पावन पर्व को बड़े ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया | होली के इस अवसर पर विद्यालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमें सभी छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया | छात्र इस त्योहार को साथ में मनाने हेतु बहुत ही उत्साहित थे | विद्यालय में इसे दो दिन मनाने का आयोजन किया गया था | पहले दिन संध्या के समय होलिका दहन का कार्यक्रम रखा गया | छात्र अपने साथी मित्रों के साथ इस कार्यक्रम को निहारने हेतु विद्यालय के प्रांगण में उपस्थित हुए | कार्यक्रम के प्रारंभ में छात्रों को आज के दिन का महत्त्व बताया और भक्त प्रह्लाद की भक्ति से अवगत किया | विद्यार्थियों को यह भी बताया कि आज परम पूज्य श्री भगतजी महाराज और तिथि के अनुसार पूज्य श्री सुहृद स्वामीजी का प्रागट्य दिन है | छात्रों को उनके जीवन से जुड़ी हुई कुछ आदर्श बातें बताई जिससे वे अपने जीवन में प्रेरणा प्राप्त कर सकें | अंत में परम पूज्य प्रगट गुरुहरि श्री के द्वारा इस पवित्र त्योहार का महत्त्व दर्शाती हुई परावाणी के प्रसाद को छात्रों के समक्ष रखा ताकि वे अपने जीवन में उस परावाणी को आत्मसात कर सकें | उसके बाद हमारी संस्था के आदरणीय अतिथियों ने ठाकुरजी की पूजा-अर्चना करके होलिका दहन का कार्यक्रम प्रारंभ किया | तत्पश्चात छात्रों ने होलिका की प्रदक्षिणा करते हुए अपने अंदर समाहित अयोग्य आदतें अग्नि देवता को समर्पित की | होली के पावन अवसर पर पूजा के बाद सभी विद्यार्थियों को खजूर का प्रसाद वितरित किया गया |

होली के दूसरे दिन छात्र आत्मीयता से अपने साथी मित्रों के साथ मिलकर रंगोत्सव का यह त्योहार मना सकें इस उद्देश्य से विद्यालय के प्रांगण में विविध रंगों से भरी थालियों को अलग-अलग स्थानों पर रखा गया था | सभी छात्रों ने गीत-संगीत के साथ मनोरंजन करते हुए एक-दूसरे पर विविध रंग डालकर बहुत उत्साह से त्योहार का आनंद उठाया | छात्र सब कुछ भूलकर संगीत के साथ झूम उठे और ऐसा लग रहा था कि होली का यह त्योहार छात्रों के जीवन में एक नया उत्साह लेकर आया हो | सच में यह छात्रों के जीवन का अविस्मरणीय संस्मरण रहा | होली हमें यह भी सिखाती है कि जीवन में विविधता ही सुंदरता लाती है | जिस प्रकार अलग-अलग रंग मिलकर एक सुंदर चित्र बनाते हैं, उसी प्रकार अलग-अलग स्वभाव और विचार वाले लोग मिलकर समाज को सुंदर बनाते हैं | इसलिए हमें एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए और हिल-मिलकर  रहना चाहिए | यदि हम होली के इस आध्यात्मिक संदेश को अपने जीवन में उतार लें, तो हमारा जीवन अधिक सुखी, शांत और सार्थक बन सकता है | हमें अपने भीतर की नकारात्मकता को समाप्त करके प्रेम, करुणा और सद्भाव के रंगों से अपने जीवन को रंगना चाहिए | इसीलिए तो एक सुंदर पंक्ति में कहा है –

“जब मन में प्रेम, जीवन में सत्य और हृदय में भक्ति हो, तभी होली का वास्तविक आनंद प्राप्त होता है।”

कमलेश सर

Smrutis of Std. 1-6 Dhuleti Utsav:

Smrutis of Std. 7-11 Dhuleti Utsav: