अध्यात्म वह शक्ति है, जो मन को स्थिर, विचारों को पवित्र और जीवन को सार्थक बनाती है।”

      परम पूज्य स्वामीश्री एवं परम पूज्य गुरुहरिश्री ने हमेशा एक बात कही है कि आध्यात्मिक व्यक्ति ही सही राष्ट्र का निर्माण कर सकता है | देश को सही राह पर वही व्यक्ति लेकर जा सकता है जिसके पास ज्ञान के साथ आध्यात्मिक संस्कार है | संस्कार और अध्यात्म मिलकर ही सच्चे व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं | अध्यात्म जीवन को सही दिशा देने वाली शक्ति है | यह मनुष्य को आत्मचिंतन, धैर्य और संतुलन सिखाता है | अध्यात्म के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर की कमजोरियों को पहचानता है और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ता है | यह हमें कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहकर सही निर्णय लेना सिखाता है, जिससे जीवन अधिक सार्थक और संतुलित बनता है |

विद्यार्थी जीवन सीखने और व्यक्तित्व निर्माण करने का महत्वपूर्ण चरण होता है | इस समय अध्यात्म विद्यार्थियों को अनुशासन, एकाग्रता और आत्मविश्वास प्रदान करता है | यह उन्हें तनाव से मुक्त रहना, भावनाओं पर नियंत्रण रखना और लक्ष्य के प्रति सजग रहना सिखाता है | आध्यात्मिक सोच विद्यार्थियों को न केवल अच्छे विद्यार्थी, बल्कि अच्छे इंसान बनने की प्रेरणा देती है |

आत्मीय विद्या मंदिर एक ऐसा विद्या का मंदिर है जहाँ पर विषय ज्ञान के साथ-साथ जीवन उपयोगी आध्यात्मिक बातें छात्रों को बताई जाती है | इस विद्यालय में छात्रों के भीतर विद्यमान सुषुप्त शक्तियों को बाहर लाने का लगातार प्रयास होता रहता है | शिक्षा के जो मूल उद्देश्य है उसकी पूर्ति हेतु विद्यालय में पूरे वर्ष में अनेक स्पर्धाओं का आयोजन किया जाता है | छात्रों का बौद्धिक, शारीरिक, सामाजिक, आध्यात्मिक विकास हो उसका ध्यान रखा जाता है और इसी उद्देश्य हेतु विद्यालय में दिनांक 7 फरवरी 2026 के दिन आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता (Spiritual Intelligence) प्रतियोगिता का आयोजन किया गया | इस प्रतियोगिता में विद्यालय के चारों सदनों के छात्र उत्साह के साथ प्रतिभागी हुए और कक्षा- 1 से 9वीं के छात्रों के लिए विविध स्पर्धाओं का आयोजन किया गया |

  • कक्षा 1 से 3 की प्रतियोगिता :

आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता प्रतियोगिता के अंतर्गत कक्षा 1, 2 एवं 3 के छात्र हेतु माननीय लोपा मैडम, माननीय श्रीजीचिंतन मैडम एवं माननीय ब्रिंदा मैडम ने विशेष प्रतियोगिता का आयोजन किया था | इस प्रतियोगिता को उन्होंने आठ चरण में विभाजित किया था | प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय चरण में स्वामी की बातों से संबंधित गतिविधियाँ आयोजित की थी | विद्यार्थियों को स्वामी की बातों के शब्द एवं नंबर चिट्ठी के माध्यम से दिए गए थे | इस चरण में माननीय शिक्षिकाओं के द्वारा शब्द बोला गया, तो कभी विद्यार्थियों ने स्वयं चिट्ठी उठाकर शब्द या नंबर प्राप्त किया | विद्यार्थियों ने दिए गए शब्द अथवा नंबर के अनुसार स्वामी की बातों का स्मरण कर स्पष्ट एवं आत्मविश्वास के साथ उनकी बातों का उच्चारण किया | इसमें छात्रों की स्मरण शक्ति और एकाग्रता अत्यंत सराहनीय रही | चतुर्थ चरण में गुरु परंपरा सूत्र आधारित प्रवृत्ति रखी गई थी | जिसमें गुरु परंपरा की मूर्तियाँ क्रमबद्ध रूप से रखी गईं और विद्यार्थियों ने मूर्ति पहचानकर संबंधित गुरु द्वारा दिए गए सूत्रों का सही पाठ किया | पंचम चरण प्रश्नोत्तरी का था | जिसके अंतर्गत विद्यार्थियों को चिट्ठी में लिखकर प्रश्न दिए गए थे और उन्होंने प्रश्नों को समझकर स्पष्ट एवं सटीक उत्तर प्रस्तुत किए | छठवें चरण में भजन गान रखा गया था | इसमें छात्रों को दी गई चिट्ठी में भजनों के नाम लिखे थे और विद्यार्थियों ने भजनों का भावपूर्ण गान किया | सातवें चरण में विद्यार्थियों को शिक्षापत्री के श्लोक नंबर चिट्ठी में लिखकर दिए थे और उस नंबर संबंधित श्लोकों का सही उच्चारण एवं भाव के साथ पाठ किया | आठवें चरण में विद्यार्थियों ने गुरु परंपरा की मूर्ति को पहचानकर संबंधित गुरु का श्लोक प्रस्तुत किया | इस तरह सभी गतिविधियों में विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ भाग लिया | विद्यार्थियों का आत्मविश्वास और प्रस्तुति प्रशंसनीय रही |

  • कक्षा 4 से 6 की प्रतियोगिता :

कक्षा 4, 5 एवं 6 के छात्र हेतु माननीय सुहानी मैडम एवं माननीय लक्ष्मी मैडम ने तीन चरण की एक स्पर्धा आयोजित की थी | इस स्पर्धा के प्रथम चरण में उन्होंने छात्रों को एक कागज़ के पृष्ठ में भगवान के नाम को उनके चित्र, उनके वाद्य और उनके वाहन के साथ सही तरीके से मिलान करके चिपकाने की गतिविधि दी थी | द्वितीय चरण की प्रवृत्ति में विद्यार्थियों ने हमारी दैनिक प्रार्थना सभा के भजनों की पंक्तियों के अधूरे शब्दों को पहचानकर उन्हें सही क्रम में चिपकाया | तत्पश्चात अपने समूह का कोई एक छात्र अथवा पूरा समूह मिलकर भजन का अगला अंतरा सही सुर और लय में गाकर सुनाया था | तृतीय चरण की गतिविधि में स्पर्धा के निर्णायक ने छात्रों को एक सूत्र दिया था | उस सूत्र को ध्यान में रखकर छात्रों ने दस मिनट तक एक छोटा-सा संवाद तैयार किया | उस छोटे-से संवाद को उन्होंने पाँच मिनट की समय सीमा में एक अच्छे संदेश के साथ प्रस्तुत किया | सहभागी छात्रों ने संवाद में अपने दैनिक जीवन में आध्यात्मिकता के महत्त्व को दिखाया |

  • कक्षा 7 से 9 की प्रतियोगिता :

कक्षा 7, 8 एवं 9वीं के छात्र हेतु श्री तरुण सर, श्री प्रभुमग्न सर, श्री कृतार्थ सर और कमलेश सर ने मिलकर सुंदर स्पर्धा का आयोजन किया था | संपूर्ण स्पर्धा को तीन चरण में विभाजित किया गया और चारों सदन के विविध छात्र इसमें उत्साह से प्रतिभागी हुए | स्पर्धा की शुरूआत में श्री तरुण सर ने छात्रों को अपने जीवन में आध्यात्मिकता के महत्त्व को समझाया और स्पर्धा के नियमों की जानकारी दी | तत्पश्चात स्पर्धा प्रारंभ हुई | स्पर्धा के प्रथम चरण में प्रत्येक सदन के चार छात्रों को एक विषय दिया गया था | दिए गए विषय को ध्यान में रखकर प्रतिभागी विद्यार्थियों ने एक महत्त्वपूर्ण संदेश वहाँ उपस्थित छात्रों तक पहुँचे ऐसा छोटा-सा संवाद प्रस्तुत किया | स्पर्धा के द्वितीय चरण में परम पूज्य स्वामीश्री की परावाणी के पोस्टरों में से हेतुलक्षी एवं लघुउत्तरीय प्रश्नों का आयोजन किया था | इसमें हर सदन के तीन-तीन छात्र सहभागी हुए और अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास किया | तीसरे चरण में प्रगट गुरु गुरुहरिश्री की भाग्योदय पर्व की परावाणी में से हेतुलक्षी प्रश्न किए और छात्रों ने बड़े ही उत्साह के साथ प्रत्युत्तर दिए थे | इस स्पर्धा को सदन का हर एक बच्चा जीतना चाहता था और सभी छात्र मिलकर अपने प्रतिभागी छात्रों का उत्साह वर्धन कर रहे थे | प्रत्येक छात्र ने इस स्पर्धा का भरपूर आनंद उठाया |

सच में आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता (Spiritual Intelligence) स्पर्धा के आयोजन का मुख्य उद्देश्य था छात्रों के भीतर विद्यमान सुषुप्त शक्तियों को बाहर लाना एवं छात्रों के अंदर समूह भावना का विकास करना | छात्रों ने न केवल स्पर्धा में भाग लिया किंतु अपनी आत्मिक चेतना को जागृत कर सकें ऐसी ज्ञानवर्धक बातें उन्हें जानने का सुअवसर प्राप्त हुआ | इससे विद्यार्थियों के आध्यात्मिक ज्ञान, संस्कार, आत्मविश्वास एवं व्यक्तित्व विकास में वृद्धि हुई | इसीलिए तो कहा है कि “आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता मनुष्य को केवल सफल नहीं, बल्कि सार्थक जीवन जीना सिखाती है |”

कमलेश सर